लोकायनामा: जालंधर में कई जगहों पर रात्रि गश्त न होने से लोग डरे हुए हैं। रात 10 बजे के बाद अधिकांश चौकों पर लोग भगवान से प्रार्थना करते नजर आते हैं।
रात 10 बजे के बाद शहर के अधिकांश चौराहे और फैक्ट्री क्षेत्र 'भगवान की शरण' बन जाते हैं। लोगों को लूटा जाता है और फिर कुछ दिनों की खबर के बाद पीसीआर गश्त शुरू होती है, फिर गश्त ढीली हो जाती है और लुटेरे फिर से बढ़ जाते हैं।

यादविंदर, जालंधर: रात 10 बजे के बाद शहर के अधिकांश चौक-चौराहे और फैक्ट्री क्षेत्र 'भगवान की शरण' बन जाते हैं। लोगों को लूटा जाता है और फिर कुछ दिनों की खबर के बाद पीसीआर गश्त शुरू होती है, फिर गश्त ढीली हो जाती है और लुटेरे फिर से बढ़ जाते हैं। कुछ दिन पहले जालंधर में शुक्ला नामक एक मजदूर की लुटेरों ने सिर्फ इसलिए हत्या कर दी क्योंकि वह अपनी जमापूंजी 50 हजार रुपये देने को तैयार नहीं था। 300. स्थिति यह है कि निर्माता नये श्रमिकों के लिए बेताब हैं। स्थिति यह है कि जालंधर फोकल प्वाइंट एक्सटेंशन के नजदीक सैकड़ों फैक्ट्रियां और समाचार पत्र मुख्यालय होने के बावजूद पीसीआर और पुलिस कर्मियों की गश्त और सख्ती उस पैमाने पर नहीं दिखती, जिसकी समय को जरूरत है। जिस तरह सोमालिया में लूटपाट की आवाजें आ रही थीं, जालंधर में भी वैसा ही माहौल महसूस किया जा रहा है। फोकल प्वाइंट एक्सटेंशन की सड़कों पर घूमने वाले मजदूर और पत्रकार रात 10 बजे से सुबह तक 'ऊपर वाले की शरणस्थली' बने रहते हैं। राहगीरों और दोपहिया वाहन सवारों से लूट की कई घटनाएं हो चुकी हैं, पास में ही पुलिस थाना है और कुल मिलाकर की गई कार्रवाई संतोषजनक नहीं है।
हर जगह 'अंधकार' का साम्राज्य है।
जैसे ही हम फोकल प्वाइंट से मकसूदा की ओर बढ़ते हैं, सड़कें सन्नाटे में डूबी होती हैं। अगर आप फोकल प्वाइंट से पठानकोट चौक की ओर जाना चाहते हैं तो सबसे खतरनाक जगह 'ट्रांसपोर्ट नगर चौक' है, जहां अज्ञात व शरारती तत्व बाइक चलाते हुए तथा फ्लाईओवर के नीचे बने पुलों के नीचे घूमते नजर आते हैं। सूत्रों का कहना है कि सब्जी मंडी बाईपास पर स्थित होने के बाद ये लुटेरे व बदमाश मंडी में छिप जाते हैं। वे रात में सड़कों पर घूमते हैं, 'शिकार' की तलाश करते हैं और अपराध करते हैं। एक ही बाइक पर 3 या 4 लोग सवार हैं। कुछ दर्जन नशेड़ी लुटेरों ने पूरे शहर को सूना कर दिया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में गश्त की कमी है।
इसी तरह रेरू पठानकोट चौक से लेकर बुलंदपुर, रावली, पंजाबी बाग, कानपुर आबादी, रायपुर रसूलपुर, बल्लां से किशनगढ़ तक रात के समय अराजक तत्व बाइकों पर सवार होकर घूमते नजर आ जाएंगे। इसी तरह अगर हम पठानकोट बाईपास चौक से शहर में जाएं तो कन्या महाविद्यालय रोड, किशनपुरा चौक से जोड़े पुल (दोमोरिया पुल) तक सड़क सुनसान है। इसी तरह इकहेड़ी पुल, कोट किशन चंद वाली रोड, टांडा रोड गेट, पंजपीर चौक, शहीद भगत सिंह चौक, मिलाप चौक, पीएनबी चौक, डा. अंबेडकर चौक से आगे आप जहां भी जाएंगे, आपको कहीं भी पुलिस कर्मियों की मौजूदगी नजर नहीं आएगी। सूत्रों के अनुसार, पकड़े जाने के बाद जब कुछ बहादुर लोगों ने लुटेरों का सामना किया और उन्हें डांटा तो लुटेरों ने पुलिस को सूचना तक नहीं दी।

बस स्टॉप के पास कोई गश्त नहीं है।
यहां तक कि शहर के बस स्टैंड से सटे पॉश इलाकों में भी पुलिस गश्त या निगरानी नहीं है। इसी प्रकार, बीएसएफ चौक से लेकर कीर्ति नगर, सहगल कालोनी, मदन फ्लोर मिल, रेलवे रोड से नीचे काजी मंडी, काली सड़क व अन्य आस-पास की बस्तियों में नशे के अड्डे तक रात 10 बजे के बाद 'एक व्यक्ति, एक की जात' वाली स्थिति स्पष्ट नजर आती है। हालांकि, 3-3 या 4-4 संदिग्ध तत्व बाइक पर घूमते नजर आ जाएंगे।

रेलवे स्टेशन के पास गश्त बहुत कम होती है।
शहर की त्रासदी यह है कि रेलवे रोड से मोहल्ला गोबिंदगढ़ व रेलवे स्टेशन के आसपास की अन्य सड़कों पर रात्रिकालीन रेहड़ी-पटरी वाले दुकानदार अब यात्रियों के लिए कम तथा बाइक सवार संदिग्ध तत्वों के लिए अधिक आश्रय स्थल बनते जा रहे हैं। रात के समय रेलवे स्टेशन से 40 क्वार्टर, रेलवे कॉलोनी, कीर्ति नगर, संत नगर आदि बस्तियों में निहत्थे या पैदल जाना अपनी जान को खतरे में डालने के समान है। नशेड़ी लुटेरों के गिरोह ने रात 10 बजे से लेकर सुबह तक जनजीवन ठप्प कर दिया है। जालंधर शहर में रात्रि पाली में काम करने वाले फैक्ट्री मजदूर, मीडिया घरानों के कर्मचारी, खोजी पत्रकार और नौकरी की तलाश में लगे रेल यात्री संघर्ष कर रहे हैं। 'मीडिया का गढ़' माना जाने वाला जालंधर अब 'लुटेरे गिरोहों का अड्डा' बनता जा रहा है। उल्लेखनीय है कि इस संबंध में पुलिस आयुक्त से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे फोन पर संपर्क नहीं हो सका।